Thursday, August 25, 2011

संसद सब से ऊपर है?

क्या बात है.....
संसद खुद ही पूछती है, और खुद ही जवाब देती है... की संसद सब से ऊपर है....
ऐसे जिंदगी में पहली दफा देखा .....
वैसे ये तो वैसे ही बात है, जैसे नौकर कहता है की में मालिक से ऊपर हूँ...
सब के सब सांसद हमारे , भारत की जनता के प्रतिनिधि हैं , और प्रतीनिधि कभी भी मालिक नहीं होते....
आप सब सांसद हमारे पैसे से तनख्वाह लेते हो, हमारे दिए हुए टैक्स से जहाजों में घूमते हो,
और खुद को हम से ऊपर कहते हो.... क्या बात है....
सांसद राजा नहीं है, रक्षक है...
वक्त आ गया है.. की जब जनता उठे और इन सब को समझाए की हम कौन हैं ...
जब तक सिर्फ कोंग्रेस घेरे में थी, सारे के सारे राजनीतिक दल उसे घेर रहे थे...
कोंग्रेस ने रणनीति बदली, और सारे राजनीतिक दलों को बैठक की....
अब वक्त आया, और सब के रंग बदल गए....
बाहर बोलने के लिए सब जन लोकपाल के साथ...
और जब मीटिंग हुई, तो एकमत नहीं हुआ....
आज वक्त आ गया है, जब सब राजनीतिक दल अपनी भूमिका स्पष्ट करे...
हर पार्टी बताये, वो क्या चाहते है...
किस चीज़ के साथ है, किस चीज़ के खिलाफ है....
हर सांसद कहे, की वो किस के साथ है...
और अगर विरोध है, तो किस विशिष्ट चीज़ का....
ऐसे कहने से नहीं चलेगे, कुछ का विरोध है, कुछ का समर्थन है.....
सीधे बताएं किस चीज़ का विरोध है.....

आप सब अपने विचार बीबीसी पर भी प्रकट कर सकते हैं

http://newsforums.bbc.co.uk/ws/hi/thread.jspa?forumID=14436

अब कहने का नहीं करने का वक्त है

मैं एक सामान्य भारतीय हूँ....
आप की ही तरह नौकरी करता हूँ..
रोज़ी रोटी के लिए, काम करता हूँ
चाहते हुए भी कई दफा कुछ नहीं कर पाता 
नहीं खड़ा हो पाता, व्यवस्था के खिलाफ ....
क्योंकि , पेट की भूख इजाज़त नहीं देती.....
लेकिन अब पानी सर से ऊपर बहने लगा है..
अगर आज कुछ न किया तो कभी न कर सकेंगे....


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