Sunday, December 29, 2013

शर्म करें अखिलेश.....

कभी कभी सोचता हूँ...
कि क्या वो इंसान ही है..
अगर आप राजनीति मैं आते हैं,
तो पूरा जिला, देश और प्रदेश आपका परिवार है....
और अगर आपके प्रदेश मैं मातम पसरा हो...
तो आप को ख़ुशी नहीं मनानी चाहिए...
जब मुज्ज़फर नगर के लोग ठण्ड मैं मर रहे हो...
उस वक्त सैफई  मैं आप गीत संगीत का आनंद ले रहे है..
उम्मीद है की उत्तर प्रदेश की जनता देख रही है.....
और इस घमंड का जवाब देगी....
http://aajtak.intoday.in/video/pain-of-muzaffarnagar-riot-victims-1-750742.html


अलविदा २०१३...

बहुत अर्से  के बाद ब्लॉग पर लिखने को दिल किया...
एक पूरा वर्ष बीत गया.. और लगता है मानों कल ही ये साल शुरू हुआ हो...
खैर ये तो सब को ही ऐसे ही लगता है...
इस मैं नया क्या है...
खैर नया तो सिर्फ यही है.. ,
कि  अब कोशिश करेंगे की दोबारा से लिखना शुरू करेंगे... 

Thursday, September 22, 2011

कब तक, हम सब इसी तरह... एक दूजे को लूटेंगे...

कल 'एक' ने मुझको लूटा था...
आज मैंने "दूजा" लूट लिया 
कल "दूजे" की बारी होगी, 
और बली किसी और की होगी...
कब तक, हम सब इसी तरह...
एक दूजे को लूटेंगे...
रिश्वत के पैसे खायेंगे...
और बेईमानी से जियेंगे....
कब तक आखिर,
कब तक आखिर....

Thursday, September 15, 2011

क्या देकर जाने चाहेंगे हम आने वाली पीढ़ी को

क्या देकर जाने चाहेंगे हम आने वाली पीढ़ी को
हर इंसान मैं सिमटी एक दुनिया, मेरी दुनिया तेरी दुनिया...
सब की अपनी अपनी दुनिया...
सब के अपने अपने से सच,
सच है तो फिर सिर्फ यही, जिस मैं मेरा ही फायदा हो
बस मेरा पेट भरा हो फिर, जग सारा चाहे भूखा हो
रिश्वत के इस जाल फंसी, निरीह सी  युवती सी दुनिया
जिस्मो को बेच , खरीद रही, संवेद हीन सी ये दुनिया .. 
शहीदों के कफ़न को बेच रही, सरकारों की ये दुनिया...
झूठ बोलना समझा कर,  बच्चों को झूठ सिखाती दुनिया
हर बार मैं मेरा तेरा है, कह कह कर लडती ये दुनिया
मैं हिन्दू हूँ, तू मुस्लिम है...राम हूँ मैं , रहीम हैं तूं
इस झूठे सच्चे, तिलिस्म मैं , मरती और लडती ये दुनिया....
कब समझेंगे हम सब मिलकर, तेरा मेरा न हमारा है...
क्या देखेंगे आती पुश्तें, बुजुर्गों ने सिर्फ बिगाड़ा है...
सब अपना पाना फर्ज समझो, जो गलत है उस के खिलाफ उठो...
रिश्वत मांगे तो मना करो ,  और लटकाए तो कारण पूछो...
अपने हक़ को तुम जान लो आज, और अपने फ़र्ज़ भी तुम समझो...
जब समझ तुम ये जाओगे, बदल जाएगी ये दुनिया...
बच्चे पोते तो होंगे तब, कह पाओगे फखर से तुम...
बहुत बुरी थी जब हम थे, और बहुत बुरी थे ये दुनिया...
हम लड़े भिड़े इस दुनिया से , तब ही बदली है ये दुनिया  

एक सपना है जो मेरा है, तू भी अपना और समझ ले ये...
अगर करना है तो करना है...
अगर आज ये न हम कर पायेंगे...
तो फिर , आने वाली पीढ़ी को...
शकल कौन सी दिखायेंगे...
नाकारा और , बुजदिल लोगों को टोली हम सब कहलायेंगे...
एक बुज़ुर्ग, और मरता हुआ मुल्क दे कर हम जायेंगे...
आओ मिल कर आगे हम बदें, गिराएँ न तरक्की की सीढ़ी को...
और फिर खुद से ही सवाल करें....
क्या देकर जाना चाहेंगे, हम आने वाली पीढ़ी को....


Thursday, August 25, 2011

संसद सब से ऊपर है?

क्या बात है.....
संसद खुद ही पूछती है, और खुद ही जवाब देती है... की संसद सब से ऊपर है....
ऐसे जिंदगी में पहली दफा देखा .....
वैसे ये तो वैसे ही बात है, जैसे नौकर कहता है की में मालिक से ऊपर हूँ...
सब के सब सांसद हमारे , भारत की जनता के प्रतिनिधि हैं , और प्रतीनिधि कभी भी मालिक नहीं होते....
आप सब सांसद हमारे पैसे से तनख्वाह लेते हो, हमारे दिए हुए टैक्स से जहाजों में घूमते हो,
और खुद को हम से ऊपर कहते हो.... क्या बात है....
सांसद राजा नहीं है, रक्षक है...
वक्त आ गया है.. की जब जनता उठे और इन सब को समझाए की हम कौन हैं ...
जब तक सिर्फ कोंग्रेस घेरे में थी, सारे के सारे राजनीतिक दल उसे घेर रहे थे...
कोंग्रेस ने रणनीति बदली, और सारे राजनीतिक दलों को बैठक की....
अब वक्त आया, और सब के रंग बदल गए....
बाहर बोलने के लिए सब जन लोकपाल के साथ...
और जब मीटिंग हुई, तो एकमत नहीं हुआ....
आज वक्त आ गया है, जब सब राजनीतिक दल अपनी भूमिका स्पष्ट करे...
हर पार्टी बताये, वो क्या चाहते है...
किस चीज़ के साथ है, किस चीज़ के खिलाफ है....
हर सांसद कहे, की वो किस के साथ है...
और अगर विरोध है, तो किस विशिष्ट चीज़ का....
ऐसे कहने से नहीं चलेगे, कुछ का विरोध है, कुछ का समर्थन है.....
सीधे बताएं किस चीज़ का विरोध है.....

आप सब अपने विचार बीबीसी पर भी प्रकट कर सकते हैं

http://newsforums.bbc.co.uk/ws/hi/thread.jspa?forumID=14436

अब कहने का नहीं करने का वक्त है

मैं एक सामान्य भारतीय हूँ....
आप की ही तरह नौकरी करता हूँ..
रोज़ी रोटी के लिए, काम करता हूँ
चाहते हुए भी कई दफा कुछ नहीं कर पाता 
नहीं खड़ा हो पाता, व्यवस्था के खिलाफ ....
क्योंकि , पेट की भूख इजाज़त नहीं देती.....
लेकिन अब पानी सर से ऊपर बहने लगा है..
अगर आज कुछ न किया तो कभी न कर सकेंगे....


Saturday, October 17, 2009

दीपावली की हार्दिक शुब कामनाएं

आप सब की ज़िन्दगी मंगलमय हो....
प्रभु आप सब की ज़िन्दगी में उम्मीद के दिए जलाये
और सब को उम्मीद से अधिक ख़ुशी एवं तरक्की दे
दीपावली की हार्दिक शुब कामनाएं 

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