Wednesday, June 4, 2014

क्या कुछ भी कहना अपराध है...

मैं एक हिन्दू हूं , और मुझे इस के लिए गर्व होना चाहिए...
लेकिन क्या यही गर्व मुझे किसी और की ज़िन्दगी लेने का अधिकार देता हैं...
सभी को अपनी भावनाएं व्यक्त करने का अधिकार है...
अगर आपको उनकी बात अच्छी नहीं लगती.. आप अपनी भावनाएं व्यक्त करें..
शब्द संयमित और उत्तेजक नहीं होने चाहिए..
महाराष्ट्र में.. एक नवयुवक को पीट पीट कर मार डाला गया...
उसका अपराध : एक सोशल साईट पर , कथित तौर पर शिवाजी महाराज एवं बाला साहब ठाकरे की आपत्तिजनक तस्वीरे /कमेन्ट
मैंने तस्वीरें नहीं देखीं , तो मैं इस स्थिति में नहीं हूँ.. कि कह सकूं की तस्वीरें आपत्तिजनक थी या नहीं..
क्या ऐसे कोई साधन नहीं है, जो देख सके कि जो उसने किया वो वास्तव में अपराध था भी या नहीं...
कानून का राग अलापने वाले कहाँ है?
कुछ दिन पहले सोशल साइट्स पर ही, शिवाजी महाराज की तस्वीर पर हमारे प्रधानमंत्री जी की तस्वीर चस्पा कर दी गई थी...
क्या ये तस्वीर आपत्तिजनक नहीं थी ?
हमें अपने आप से पूछना पड़ेगा...
क्या समाज में ऐसा व्यवहार स्वीकार्य हैं?
क्या हम इतने असहिष्णु हो गए हैं...
क्या किसी को सिर्फ अपना मत व्यक्त कर देने के लिए जान से मार देना चाहिए..
ये अच्छी परम्परा नहीं है..

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