Saturday, January 4, 2014

भारत - क्या राजनीति बदल रही है ?

पिछले कुछ समय से भारतीय राजनीति में बदलाव की बयार बह रही लगती है...
अगर हम इतिहास में  वापिस जाएँ.. तो स्वतंत्रता पूर्व एवं पश्चात् काँग्रेस राजनीति का पर्याय बन चुकी थी..
जो राजनीति सेवा के लिए जानी जाती थी, भ्रष्टाचार उस में रचने बसने लगा...
आज की भाजपा, जन संघ से शुरू  हुई... बहुत देर तक भाजपा काँग्रेस का विकल्प लगता था...
पंडित अटल बिहारी वाजपेयी ने दिल्ली में सरकार बनायी , १ वर्ष में ही सरकार सिर्फ १ वोट की वजह से गिर गई...भाजपा ने अन्य दलों के साथ मिल कर सरकार बनाई, और अगले पांच वर्षों तक सरकार चलाई...
इस के पश्चात कई बातों से लगा मानो भाजपा का कांग्रेसीकरण हो गया हो..
कर्नाटक में जो हुआ, और रेड्डी बंधुओं को मिला अभयदान शायद उसी पर मुहर लगाते है...
इस से पहले जो वाजपेयी सरकार सिर्फ एक वोट की वजह से गिर गई थी, उसी के नेताओं के सुर बदल गए...
इस मैं सिर्फ भाजपा को दोष देना भी गलत होगा... अगर हम सपा (समाजवादी पार्टी ), बसपा (बहुजन समाज पार्टी ), अकाली दल, झारखण्ड मुक्ति मोर्चा और अन्य दलों को देखें ... तो सभी एक जैसे दिखाई देते हैं..

अगर किसी पर भी  भ्रष्टाचार का आरोप लगे, तो वो कहने लगे की भाई आप ने भी तो वहां भ्रष्टाचार किया था.. और इस में कोई नेता पीछे नहीं रहा...

सभी राजनैतिक दलों में अच्छे नेता आज भी हैं, लेकिन अधिकतर वो हाशिये पर जा चुके हैं

अन्ना और अरविन्द केजरीवाल ने बहुत से अन्य लोगों से साथ मिलकर जन्लोकपाल  बिल के लिए संघर्ष किया, इस के लिए सामान्य लोग सड़कों पर आ गए... लेकिन सरकार ने इसे सिर्फ वायदों के साथ छोड़ किया... संघर्ष के दौरान नेता कहने लगे, की आप लोग ऐसे सड़क से कानून नहीं बना सकते, इस के लिए आप को चुनाव लड़ना पड़ेगा, सरकार बनानी पड़ेगी...इस की परिणीती आप (आम आदमी पार्टी) के रूप में हुई...


सब लोग कहने लगे, ये लड़ सकते हैं, जीत नहीं सकते.... आप ने सब को भ्रष्टाचारी कहा , अन्य दल भी पीछे नहीं रहे, किसी ने इन्हें बरसाती कीड़े कहा,

आप एक आन्दोलन से पैदा हुआ दल था...आप ने दिल्ली के अन्दर चुनाव लड़ा  ..भाजपा को अपना नेता बदलना पड़ा .. डॉक्टर हर्षवर्धन सामने आये.. भाजपा को बत्तीस एवं आप को 28 सीटें मिली .. भाजपा और आप ने सरकार बनाने से मना कर दिया ,  उपराज्यपाल ने भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया...बहुमत न होने की वजह से उन्होंने सरकार बनाने से मना कर दिया...

लगने लगा की दिल्ली मैं राष्ट्रपति शासन लग जाएगा... क्योंकि भाजपा पीछे हट चुकी थी, और आप कह चुकी थी की वो किसी से समर्थन नहीं लेंगे..

काँग्रेस ने फिर से राजनीती की, बिना आप से बात किये उपराज्यपाल को समर्थन की चिट्ठी भेजी...

सभी नेता कहने लगे, की आप को सरकार बनानी चाहिए... भाजपा एवं काँग्रेस दोनों कहने लगे की आप अपनी ज़िम्मेदारी से भाग रही है...
आप ने भाजपा और काँग्रेस दोनों को चिठ्ठी लिखी , और पुछा की उन दोनों दलों का उन मुद्दों पर क्या विचार है, जिन के लिए आप ने चुनाप लड़ा है...
भाजपा ने जवाब ही नहीं दिया, ये वही भाजपा थी जो कह रही थी की वो सकारात्मक मुद्दों पर समर्थन करेगी..
काँग्रेस ने मुद्दों पर समर्थन दिया...

आप ने दिल्ली में  मोहल्ला सभाएं की, लोगों से पुछा, और निर्णय लिया की सरकार बनाई जायेगी, लेकिन उन मुद्दों के साथ जिन के साथ उन्होंने चुनाव लड़ा है

आप ने सरकार बनाई, और अपने मुद्दों पर सरकार बनाई.. काँग्रेस को कोई मंत्री पद नहीं दिया गया, काँग्रेस ने बाहर से समर्थन दिया..

एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है..
अगर आप सिद्धांतो के साथ आगे बदती है, जनता के लिए काम करती है, और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाती है,
तो ये भारत के लिए बहुत ही शुभ संकेत होगा..
अगर आप भी अन्य दलों के जैसे बदल जायेंगे, तो वो भी पतन की और अग्रसर हो जायेंगे..
कम से कम आज के दिन तो आप अन्य दलों से अलग दिख रही है...

Sunday, December 29, 2013

शर्म करें अखिलेश.....

कभी कभी सोचता हूँ...
कि क्या वो इंसान ही है..
अगर आप राजनीति मैं आते हैं,
तो पूरा जिला, देश और प्रदेश आपका परिवार है....
और अगर आपके प्रदेश मैं मातम पसरा हो...
तो आप को ख़ुशी नहीं मनानी चाहिए...
जब मुज्ज़फर नगर के लोग ठण्ड मैं मर रहे हो...
उस वक्त सैफई  मैं आप गीत संगीत का आनंद ले रहे है..
उम्मीद है की उत्तर प्रदेश की जनता देख रही है.....
और इस घमंड का जवाब देगी....
http://aajtak.intoday.in/video/pain-of-muzaffarnagar-riot-victims-1-750742.html


अलविदा २०१३...

बहुत अर्से  के बाद ब्लॉग पर लिखने को दिल किया...
एक पूरा वर्ष बीत गया.. और लगता है मानों कल ही ये साल शुरू हुआ हो...
खैर ये तो सब को ही ऐसे ही लगता है...
इस मैं नया क्या है...
खैर नया तो सिर्फ यही है.. ,
कि  अब कोशिश करेंगे की दोबारा से लिखना शुरू करेंगे... 

Thursday, September 22, 2011

कब तक, हम सब इसी तरह... एक दूजे को लूटेंगे...

कल 'एक' ने मुझको लूटा था...
आज मैंने "दूजा" लूट लिया 
कल "दूजे" की बारी होगी, 
और बली किसी और की होगी...
कब तक, हम सब इसी तरह...
एक दूजे को लूटेंगे...
रिश्वत के पैसे खायेंगे...
और बेईमानी से जियेंगे....
कब तक आखिर,
कब तक आखिर....

Thursday, September 15, 2011

क्या देकर जाने चाहेंगे हम आने वाली पीढ़ी को

क्या देकर जाने चाहेंगे हम आने वाली पीढ़ी को
हर इंसान मैं सिमटी एक दुनिया, मेरी दुनिया तेरी दुनिया...
सब की अपनी अपनी दुनिया...
सब के अपने अपने से सच,
सच है तो फिर सिर्फ यही, जिस मैं मेरा ही फायदा हो
बस मेरा पेट भरा हो फिर, जग सारा चाहे भूखा हो
रिश्वत के इस जाल फंसी, निरीह सी  युवती सी दुनिया
जिस्मो को बेच , खरीद रही, संवेद हीन सी ये दुनिया .. 
शहीदों के कफ़न को बेच रही, सरकारों की ये दुनिया...
झूठ बोलना समझा कर,  बच्चों को झूठ सिखाती दुनिया
हर बार मैं मेरा तेरा है, कह कह कर लडती ये दुनिया
मैं हिन्दू हूँ, तू मुस्लिम है...राम हूँ मैं , रहीम हैं तूं
इस झूठे सच्चे, तिलिस्म मैं , मरती और लडती ये दुनिया....
कब समझेंगे हम सब मिलकर, तेरा मेरा न हमारा है...
क्या देखेंगे आती पुश्तें, बुजुर्गों ने सिर्फ बिगाड़ा है...
सब अपना पाना फर्ज समझो, जो गलत है उस के खिलाफ उठो...
रिश्वत मांगे तो मना करो ,  और लटकाए तो कारण पूछो...
अपने हक़ को तुम जान लो आज, और अपने फ़र्ज़ भी तुम समझो...
जब समझ तुम ये जाओगे, बदल जाएगी ये दुनिया...
बच्चे पोते तो होंगे तब, कह पाओगे फखर से तुम...
बहुत बुरी थी जब हम थे, और बहुत बुरी थे ये दुनिया...
हम लड़े भिड़े इस दुनिया से , तब ही बदली है ये दुनिया  

एक सपना है जो मेरा है, तू भी अपना और समझ ले ये...
अगर करना है तो करना है...
अगर आज ये न हम कर पायेंगे...
तो फिर , आने वाली पीढ़ी को...
शकल कौन सी दिखायेंगे...
नाकारा और , बुजदिल लोगों को टोली हम सब कहलायेंगे...
एक बुज़ुर्ग, और मरता हुआ मुल्क दे कर हम जायेंगे...
आओ मिल कर आगे हम बदें, गिराएँ न तरक्की की सीढ़ी को...
और फिर खुद से ही सवाल करें....
क्या देकर जाना चाहेंगे, हम आने वाली पीढ़ी को....


Thursday, August 25, 2011

संसद सब से ऊपर है?

क्या बात है.....
संसद खुद ही पूछती है, और खुद ही जवाब देती है... की संसद सब से ऊपर है....
ऐसे जिंदगी में पहली दफा देखा .....
वैसे ये तो वैसे ही बात है, जैसे नौकर कहता है की में मालिक से ऊपर हूँ...
सब के सब सांसद हमारे , भारत की जनता के प्रतिनिधि हैं , और प्रतीनिधि कभी भी मालिक नहीं होते....
आप सब सांसद हमारे पैसे से तनख्वाह लेते हो, हमारे दिए हुए टैक्स से जहाजों में घूमते हो,
और खुद को हम से ऊपर कहते हो.... क्या बात है....
सांसद राजा नहीं है, रक्षक है...
वक्त आ गया है.. की जब जनता उठे और इन सब को समझाए की हम कौन हैं ...
जब तक सिर्फ कोंग्रेस घेरे में थी, सारे के सारे राजनीतिक दल उसे घेर रहे थे...
कोंग्रेस ने रणनीति बदली, और सारे राजनीतिक दलों को बैठक की....
अब वक्त आया, और सब के रंग बदल गए....
बाहर बोलने के लिए सब जन लोकपाल के साथ...
और जब मीटिंग हुई, तो एकमत नहीं हुआ....
आज वक्त आ गया है, जब सब राजनीतिक दल अपनी भूमिका स्पष्ट करे...
हर पार्टी बताये, वो क्या चाहते है...
किस चीज़ के साथ है, किस चीज़ के खिलाफ है....
हर सांसद कहे, की वो किस के साथ है...
और अगर विरोध है, तो किस विशिष्ट चीज़ का....
ऐसे कहने से नहीं चलेगे, कुछ का विरोध है, कुछ का समर्थन है.....
सीधे बताएं किस चीज़ का विरोध है.....

आप सब अपने विचार बीबीसी पर भी प्रकट कर सकते हैं

http://newsforums.bbc.co.uk/ws/hi/thread.jspa?forumID=14436

अब कहने का नहीं करने का वक्त है

मैं एक सामान्य भारतीय हूँ....
आप की ही तरह नौकरी करता हूँ..
रोज़ी रोटी के लिए, काम करता हूँ
चाहते हुए भी कई दफा कुछ नहीं कर पाता 
नहीं खड़ा हो पाता, व्यवस्था के खिलाफ ....
क्योंकि , पेट की भूख इजाज़त नहीं देती.....
लेकिन अब पानी सर से ऊपर बहने लगा है..
अगर आज कुछ न किया तो कभी न कर सकेंगे....


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