पिछले कुछ समय से भारतीय राजनीति में बदलाव की बयार बह रही लगती है...
अगर हम इतिहास में वापिस जाएँ.. तो स्वतंत्रता पूर्व एवं पश्चात् काँग्रेस राजनीति का पर्याय बन चुकी थी..
जो राजनीति सेवा के लिए जानी जाती थी, भ्रष्टाचार उस में रचने बसने लगा...
आज की भाजपा, जन संघ से शुरू हुई... बहुत देर तक भाजपा काँग्रेस का विकल्प लगता था...
पंडित अटल बिहारी वाजपेयी ने दिल्ली में सरकार बनायी , १ वर्ष में ही सरकार सिर्फ १ वोट की वजह से गिर गई...भाजपा ने अन्य दलों के साथ मिल कर सरकार बनाई, और अगले पांच वर्षों तक सरकार चलाई...
इस के पश्चात कई बातों से लगा मानो भाजपा का कांग्रेसीकरण हो गया हो..
कर्नाटक में जो हुआ, और रेड्डी बंधुओं को मिला अभयदान शायद उसी पर मुहर लगाते है...
इस से पहले जो वाजपेयी सरकार सिर्फ एक वोट की वजह से गिर गई थी, उसी के नेताओं के सुर बदल गए...
इस मैं सिर्फ भाजपा को दोष देना भी गलत होगा... अगर हम सपा (समाजवादी पार्टी ), बसपा (बहुजन समाज पार्टी ), अकाली दल, झारखण्ड मुक्ति मोर्चा और अन्य दलों को देखें ... तो सभी एक जैसे दिखाई देते हैं..
अगर किसी पर भी भ्रष्टाचार का आरोप लगे, तो वो कहने लगे की भाई आप ने भी तो वहां भ्रष्टाचार किया था.. और इस में कोई नेता पीछे नहीं रहा...
सभी राजनैतिक दलों में अच्छे नेता आज भी हैं, लेकिन अधिकतर वो हाशिये पर जा चुके हैं
अन्ना और अरविन्द केजरीवाल ने बहुत से अन्य लोगों से साथ मिलकर जन्लोकपाल बिल के लिए संघर्ष किया, इस के लिए सामान्य लोग सड़कों पर आ गए... लेकिन सरकार ने इसे सिर्फ वायदों के साथ छोड़ किया... संघर्ष के दौरान नेता कहने लगे, की आप लोग ऐसे सड़क से कानून नहीं बना सकते, इस के लिए आप को चुनाव लड़ना पड़ेगा, सरकार बनानी पड़ेगी...इस की परिणीती आप (आम आदमी पार्टी) के रूप में हुई...
सब लोग कहने लगे, ये लड़ सकते हैं, जीत नहीं सकते.... आप ने सब को भ्रष्टाचारी कहा , अन्य दल भी पीछे नहीं रहे, किसी ने इन्हें बरसाती कीड़े कहा,
आप एक आन्दोलन से पैदा हुआ दल था...आप ने दिल्ली के अन्दर चुनाव लड़ा ..भाजपा को अपना नेता बदलना पड़ा .. डॉक्टर हर्षवर्धन सामने आये.. भाजपा को बत्तीस एवं आप को 28 सीटें मिली .. भाजपा और आप ने सरकार बनाने से मना कर दिया , उपराज्यपाल ने भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया...बहुमत न होने की वजह से उन्होंने सरकार बनाने से मना कर दिया...
लगने लगा की दिल्ली मैं राष्ट्रपति शासन लग जाएगा... क्योंकि भाजपा पीछे हट चुकी थी, और आप कह चुकी थी की वो किसी से समर्थन नहीं लेंगे..
काँग्रेस ने फिर से राजनीती की, बिना आप से बात किये उपराज्यपाल को समर्थन की चिट्ठी भेजी...
सभी नेता कहने लगे, की आप को सरकार बनानी चाहिए... भाजपा एवं काँग्रेस दोनों कहने लगे की आप अपनी ज़िम्मेदारी से भाग रही है...
आप ने भाजपा और काँग्रेस दोनों को चिठ्ठी लिखी , और पुछा की उन दोनों दलों का उन मुद्दों पर क्या विचार है, जिन के लिए आप ने चुनाप लड़ा है...
भाजपा ने जवाब ही नहीं दिया, ये वही भाजपा थी जो कह रही थी की वो सकारात्मक मुद्दों पर समर्थन करेगी..
काँग्रेस ने मुद्दों पर समर्थन दिया...
आप ने दिल्ली में मोहल्ला सभाएं की, लोगों से पुछा, और निर्णय लिया की सरकार बनाई जायेगी, लेकिन उन मुद्दों के साथ जिन के साथ उन्होंने चुनाव लड़ा है
आप ने सरकार बनाई, और अपने मुद्दों पर सरकार बनाई.. काँग्रेस को कोई मंत्री पद नहीं दिया गया, काँग्रेस ने बाहर से समर्थन दिया..
एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है..
अगर आप सिद्धांतो के साथ आगे बदती है, जनता के लिए काम करती है, और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाती है,
तो ये भारत के लिए बहुत ही शुभ संकेत होगा..
अगर आप भी अन्य दलों के जैसे बदल जायेंगे, तो वो भी पतन की और अग्रसर हो जायेंगे..
कम से कम आज के दिन तो आप अन्य दलों से अलग दिख रही है...
अगर हम इतिहास में वापिस जाएँ.. तो स्वतंत्रता पूर्व एवं पश्चात् काँग्रेस राजनीति का पर्याय बन चुकी थी..
जो राजनीति सेवा के लिए जानी जाती थी, भ्रष्टाचार उस में रचने बसने लगा...
आज की भाजपा, जन संघ से शुरू हुई... बहुत देर तक भाजपा काँग्रेस का विकल्प लगता था...
पंडित अटल बिहारी वाजपेयी ने दिल्ली में सरकार बनायी , १ वर्ष में ही सरकार सिर्फ १ वोट की वजह से गिर गई...भाजपा ने अन्य दलों के साथ मिल कर सरकार बनाई, और अगले पांच वर्षों तक सरकार चलाई...
इस के पश्चात कई बातों से लगा मानो भाजपा का कांग्रेसीकरण हो गया हो..
कर्नाटक में जो हुआ, और रेड्डी बंधुओं को मिला अभयदान शायद उसी पर मुहर लगाते है...
इस से पहले जो वाजपेयी सरकार सिर्फ एक वोट की वजह से गिर गई थी, उसी के नेताओं के सुर बदल गए...
इस मैं सिर्फ भाजपा को दोष देना भी गलत होगा... अगर हम सपा (समाजवादी पार्टी ), बसपा (बहुजन समाज पार्टी ), अकाली दल, झारखण्ड मुक्ति मोर्चा और अन्य दलों को देखें ... तो सभी एक जैसे दिखाई देते हैं..
अगर किसी पर भी भ्रष्टाचार का आरोप लगे, तो वो कहने लगे की भाई आप ने भी तो वहां भ्रष्टाचार किया था.. और इस में कोई नेता पीछे नहीं रहा...
सभी राजनैतिक दलों में अच्छे नेता आज भी हैं, लेकिन अधिकतर वो हाशिये पर जा चुके हैं
अन्ना और अरविन्द केजरीवाल ने बहुत से अन्य लोगों से साथ मिलकर जन्लोकपाल बिल के लिए संघर्ष किया, इस के लिए सामान्य लोग सड़कों पर आ गए... लेकिन सरकार ने इसे सिर्फ वायदों के साथ छोड़ किया... संघर्ष के दौरान नेता कहने लगे, की आप लोग ऐसे सड़क से कानून नहीं बना सकते, इस के लिए आप को चुनाव लड़ना पड़ेगा, सरकार बनानी पड़ेगी...इस की परिणीती आप (आम आदमी पार्टी) के रूप में हुई...
सब लोग कहने लगे, ये लड़ सकते हैं, जीत नहीं सकते.... आप ने सब को भ्रष्टाचारी कहा , अन्य दल भी पीछे नहीं रहे, किसी ने इन्हें बरसाती कीड़े कहा,
आप एक आन्दोलन से पैदा हुआ दल था...आप ने दिल्ली के अन्दर चुनाव लड़ा ..भाजपा को अपना नेता बदलना पड़ा .. डॉक्टर हर्षवर्धन सामने आये.. भाजपा को बत्तीस एवं आप को 28 सीटें मिली .. भाजपा और आप ने सरकार बनाने से मना कर दिया , उपराज्यपाल ने भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया...बहुमत न होने की वजह से उन्होंने सरकार बनाने से मना कर दिया...
लगने लगा की दिल्ली मैं राष्ट्रपति शासन लग जाएगा... क्योंकि भाजपा पीछे हट चुकी थी, और आप कह चुकी थी की वो किसी से समर्थन नहीं लेंगे..
काँग्रेस ने फिर से राजनीती की, बिना आप से बात किये उपराज्यपाल को समर्थन की चिट्ठी भेजी...
सभी नेता कहने लगे, की आप को सरकार बनानी चाहिए... भाजपा एवं काँग्रेस दोनों कहने लगे की आप अपनी ज़िम्मेदारी से भाग रही है...
आप ने भाजपा और काँग्रेस दोनों को चिठ्ठी लिखी , और पुछा की उन दोनों दलों का उन मुद्दों पर क्या विचार है, जिन के लिए आप ने चुनाप लड़ा है...
भाजपा ने जवाब ही नहीं दिया, ये वही भाजपा थी जो कह रही थी की वो सकारात्मक मुद्दों पर समर्थन करेगी..
काँग्रेस ने मुद्दों पर समर्थन दिया...
आप ने दिल्ली में मोहल्ला सभाएं की, लोगों से पुछा, और निर्णय लिया की सरकार बनाई जायेगी, लेकिन उन मुद्दों के साथ जिन के साथ उन्होंने चुनाव लड़ा है
आप ने सरकार बनाई, और अपने मुद्दों पर सरकार बनाई.. काँग्रेस को कोई मंत्री पद नहीं दिया गया, काँग्रेस ने बाहर से समर्थन दिया..
एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है..
अगर आप सिद्धांतो के साथ आगे बदती है, जनता के लिए काम करती है, और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाती है,
तो ये भारत के लिए बहुत ही शुभ संकेत होगा..
अगर आप भी अन्य दलों के जैसे बदल जायेंगे, तो वो भी पतन की और अग्रसर हो जायेंगे..
कम से कम आज के दिन तो आप अन्य दलों से अलग दिख रही है...
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