इतिहास लोगों के पलायन और उसके बाद उनके संघर्ष की कहानी है ..
पलायन एक बहुत बड़ी वास्तविकता है, और ये हर समय, समाज और देश में होता रहा है..
चाहे वो भारत में , मध्य पूर्व से आने वाले आर्य हों... या फिर सारी दुनिया से अमेरिका को जाने वाले लोग हो... न्यू यॉर्क मैं स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी तो पलायन कर के आने वाले लोगों के लिए प्रवेश द्वार बन गया..
चाहे पूर्वी यूरोप से इंग्लॅण्ड आने वाले लोग हो.. ये सब पलायन के ही अलग अलग रूप है....
भारत में भी यह एक सत्य है...
सवाल ये है, की पलायन क्यों होता है...
एतिहासिक तौर पर पलायन का प्रमुख कारण आर्थिक रहा है.. जब लोग अपने पैत्रिक स्थान पर आर्थिक समृधि के लिए ज्यादा साधन नहीं देखते, तो उस तरफ जाने की कोशिश करते हैं, जहाँ पर वो साधन हो...
गाँवों से शहरों की और पलायन, इसका एक उदाहरण है...
अब सवाल है, भारत से विदेशों को पलायन ..
तो इस पलायन को मैं श्रेणियों में बांटना चाहूँगा..
पहला पलायन पढ़े लिखे लोग है, जिस मैं डॉक्टर, इंजिनियर, और वैज्ञानिक है...
दूसरी श्रेणी में वो लोग है, जो ज्यादा पढ़े लिखे नहीं है, और मजदूर वर्ग का प्रधिनित्व करते हैं..
दोनों श्रेणियो के पलायन के कारण अलग है...
दूसरी श्रेणी के लिए पलायन का कारण मूलतः आर्थिक हैं, उन्हें लगता है कि जिस काम के लिए भारत में कम तनख्वाह मिलती है , और उस तनख्वाह में वो आर्थिक रूप से समृद्ध नहीं हो सकते, उसी काम के लिए उन्हें अच्छा मेहनताना मिल सकता है परदेस में, और वो अधिक खुश रह सकते हैं....
पहली श्रेणी के लोगों का कारण मुख्यतः आर्थिक कम होता है.., ये लोग ज़्यादातर अच्छी पगार लेने वाले लोग होते है, इन लोगों का समाज में अच्छा रूतबा होता है, मध्यम या फिर उच्च मध्यम वर्ग से सम्बन्ध रखते है..ये लोग ज़्यादातर रोज़ मर्रा की चीज़ों को खरीद सकने का माद्दा रखते है.. तो फिर ये लोग क्यों देश को छोड़ कर परदेस का रुख क्यों करते है... मेरे हिसाब से इस का बहुत बड़ा कारण सामजिक व्यवस्था है... जब मैं छोटा था , तो कभी कभी सुना करता था, फलाना आदमी बहुत पढ़ लिख गया था, तो उसका दिमाग खराब हो गया.. मुझे उस समय ये बात समझ नहीं आती थी, अब शायद थोड़ी सी समझ आई , की असल में वो ये समझ नहीं पा रहे थे, कि क्यों समाज में इतनी अव्यवस्था है, और चीज़ें इतनी गड्ड मड्ड क्यों है...और चीज़ें व्यवस्थित क्यों नहीं है..और जब वो इसके खिलाफ से एक आदर्श व्यवस्था की उम्मीद करता है, तो गड़बड़ होती है
जब इस श्रेणी के लोग समाज को अपना योगदान देना चाहते हो, ईमानदारी से जीना चाहते हो, और ढंग से जीना चाहते हो... हमारा समाज इस तरह जीने नहीं देता... सरकारी नीतियों, और नैतिक अवमूल्यन की वजह से सामाजिक जीवन स्तर पतन की तरफ बढ़ रहा है.. इस वजह से जो निकल सकते हो, वो पलायन कर जाते है.. हालाँकि सभी पलायन नहीं करते, बहुत से लोग उसी समाज में रह कर उसे सुधारने की कोशिश भी करते हैं..
कोई भी वो गलियां, गाँव और दोस्त नहीं छोड़ना चाहता , जो उसके शरीर और आत्मा तक में बसे होता है... लेकिन सामाजिक अव्यवस्था इस इच्छा पर भारी हो जाती है, और इंसान भरे मन से पलायन कर जाते हैं
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