रुखसाना को सलाम आज आपकी पहचान उस लड़की से करवाते है... जिस से हर लड़की को प्रेरणा लेनी चाहिए ... लड़की को क्या, हर भारतीय को, हर इंसान को प्रेरणा लेनी चाहिए.... कि ज़ुल्म को सहना भी ज़ुल्म को बढावा देने कि बराबर है .... जम्मू और कश्मीर मैं .... रुखसाना के घर आतंकवादी आये ... उसके माता पिता को पीटने लगे.... उस से देखा नहीं गया, तो वो और उसका भाई सामने आये और उन्होंने मुकाबला किया इक उग्रवादी मारा गया, दूसरा बुरी तरह घायल हो कर मारा गया.... सलाम है उस लड़की को और उस के भाई को.... उग्रवाद गलत है, फिर चाहे वो किसी भी रूप में हो... अब मेरा सवाल उन लोगों से है, जो खुद को जेहाद का समर्थक कहते है.... अब इस के बारे में उन का कोई बयान क्यूँ नहीं आ रहा क्यों कोई नहीं कह रहा, की उस परिवार के साथ गलत हो रहा था.... जो हिंदुस्तान की पर रह कर, उसी की ज़मीन पे पैदा हुई रोटी खा कर , उसी को गाली देते है...
और पाकिस्तान जिंदाबाद कहते है.... ये सच है, की बहुत बार निर्दोष भी मारे जाते होंगे... लेकिन जो ज्यादातर उग्रवादी मारे जाते है, उस के लिए सारे मानवाधिकार के लोग खड़े हो जाते है... अब वो कहा है .... कृपया अपने अन्दर झांके, और इस दोहरी ज़िन्दगी से बहार आये... सबके विचार आमंत्रित है.... फिर चाहे इस लेख के समर्थन में हो, या फिर विरोध में
सम्बंधित लेख के लिए क्लिक करें
रुखसाना की तस्वीर BBC से साभार ली गई है.
आप और मैं, हम सब लोग.. बहुत कुछ देखते है, सुनते है.... फिर चुप रहते है, कहते कुछ नहीं... आइये, कुछ कहे.... अपने विचार व्यक्त करे.... आखिर बाकी सब को तो पता हो सच क्या है... जब सब लोग मिल के सच कहेंगे... शायद गलत करने वालों को अपनी गलती का एहसास हो....
Wednesday, September 30, 2009
Tuesday, September 22, 2009
बस कीजिये, मैडम मायावती
मैडम मायावती जी ने उत्तर प्रदेश का उद्धार कर रखा है...
जिस देश में करोडों लोग 10-20 रुपये रोज़ की आमदनी पे जीने को मजबूर हो...
जहाँ 90 रुपये किलो दाल मिलती हो....
बार बार लगातार...
और उनकी पुतला ट्रेन रुकने का नाम ही नहीं ले रही...
पहले लोगों के मरने के बाद पुतले लगाये जाते थे...]
अब जीवित लोगों के लगाये जाते है...
करोडो, अरबों रुपये मैडम के पुतले लगाये जाते है...
पार्क बनाये जाते है....
आँखें खोलो और जनता के लिए कुछ करें...
अब इस पर तुर्रा ये,
अगर इस बात पर ऐतराज़ किया जाए,
तो दलित तुष्टिकरण की बात की जाती है...
कहा जाता है, की सवर्ण जातियाँ जल रही है....
मायावती मैडम,
जो भूख से मरता है, वो दलित या सवर्ण नहीं होता...
वो इंसान होता है, गरीब होता है, भूखा होता है....
आपका पुतला लगने से किसी को कुछ नहीं मिलेगा...
लोगों को रोज़गार देने के लिए कुछ करें,
इन करोडों रुपये के साथ लोगों के भले का कुछ काम करें....
आँखें खोलें,
इस लेख से जुडा उत्तर प्रदेश हाई कोर्ट का एक फैसला पढें
बचा लीजिये पंजाब को
आज सब से पहली पोस्ट ...
और वो अपनी जन्म भूमि पंजाब के लिए..
बहुत देर से एक तमाशा देख रहे थे...
तो दिल किया आज इस पे कुछ लिखा जाए
एक सवाल, राजनीतिज्ञों के लिए
बादल साहब, आप लुधिआना के सिटी सेण्टर के लिए शोर मचते है
या फिर अपना गाँवों का वोट बैंक
और अमरिंदर साहब आप को बादल साहब के ऑरबिट रिसॉर्ट दीखता है
या फिर शहरों का वोट बैंक
भट्ठल मैडम को सिर्फ मुख्यमंत्री की कुर्सी दिखती है
जनाब, कोई जनता को भी देख लो
जिस की वोट ले के आप लोग आये हो...
हर रोज़ 10-12 घंटे का बिजली का कट ...
क्या किसी ने सोचा है, हर रोज़ 10 घंटे बिजली के कट का क्या मतलब है
जो लोग काम कर सकते है वो भी खाली बैठे हो
या फिर उन्हें मजबूर किया जाए की वो लोग जनरेटर का प्रयोग करें
और श्रीमान जी , क्या कोई ये बताएगा
जिन १० घंटा रोज़ का कट लगता है, उस वक्त के लिए बिजली बोर्ड कोई पैसे वापस करता है उपभोक्ता को?
नहीं कोई नहीं देता,
आज भी सब लोग चुंगी दे रहे है, बिजली के बिल पर,
हालांकि चुंगी नहीं है पंजाब में
इस सस्ती लोकप्रियता के लिए सब को तकलीफ न दे....
एक बहुत पुरानी बात है,
मुफ्त में मिली चीज़ की कीमत नहीं पड़ती
उसी तरह मुफ्त में मिले पानी की कीमत नहीं पड़ रही
मोटर चल रही है
पानी बाहर जा रहा है
किसी को फर्क नहीं
हर साल ज़मीनी पानी 5-10 फुट नीचे जा रहा है
किसी को फर्क नहीं
आँखें खोलिए
बिजली के मीटर लगाइए
जो लोग पानी को बर्बाद करते है, वो लोग बिल के दर से उसे ढंग से प्रयोग करेंगे
चावल के इलावा किसी और फसल को बढावा दे.
इस से न सिर्फ ज़मीनी पानी को बचाया जा सकेगा,
बल्कि बिजली की भी बचत होगी
सौर उर्जा से लगने वाले पम्प पर सब्सिडी दे
कोई भी समझ सकता है, अगर बिजली होगी तभी तो उद्योग चलेंगे
हर उद्योगपति बद्दी जा रहा है , गुडगाँव जा रहा है
क्या अब भी आपको अकल नहीं आ रही
या बर्बाद कर के ही हटेंगे
सोचिये ....
दैनिक भास्कर में एक समाचार पड़ा था
आप भी देखें
http://www.bhaskar.com/2009/09/22/090922070827_politics_in_chandiagarh.html
बहुत देर से एक तमाशा देख रहे थे...
तो दिल किया आज इस पे कुछ लिखा जाए
एक सवाल, राजनीतिज्ञों के लिए
बादल साहब, आप लुधिआना के सिटी सेण्टर के लिए शोर मचते है
या फिर अपना गाँवों का वोट बैंक
और अमरिंदर साहब आप को बादल साहब के ऑरबिट रिसॉर्ट दीखता है
या फिर शहरों का वोट बैंक
भट्ठल मैडम को सिर्फ मुख्यमंत्री की कुर्सी दिखती है
जनाब, कोई जनता को भी देख लो
जिस की वोट ले के आप लोग आये हो...
हर रोज़ 10-12 घंटे का बिजली का कट ...
क्या किसी ने सोचा है, हर रोज़ 10 घंटे बिजली के कट का क्या मतलब है
जो लोग काम कर सकते है वो भी खाली बैठे हो
या फिर उन्हें मजबूर किया जाए की वो लोग जनरेटर का प्रयोग करें
और श्रीमान जी , क्या कोई ये बताएगा
जिन १० घंटा रोज़ का कट लगता है, उस वक्त के लिए बिजली बोर्ड कोई पैसे वापस करता है उपभोक्ता को?
नहीं कोई नहीं देता,
आज भी सब लोग चुंगी दे रहे है, बिजली के बिल पर,
हालांकि चुंगी नहीं है पंजाब में
इस सस्ती लोकप्रियता के लिए सब को तकलीफ न दे....
एक बहुत पुरानी बात है,
मुफ्त में मिली चीज़ की कीमत नहीं पड़ती
उसी तरह मुफ्त में मिले पानी की कीमत नहीं पड़ रही
मोटर चल रही है
पानी बाहर जा रहा है
किसी को फर्क नहीं
हर साल ज़मीनी पानी 5-10 फुट नीचे जा रहा है
किसी को फर्क नहीं
आँखें खोलिए
बिजली के मीटर लगाइए
जो लोग पानी को बर्बाद करते है, वो लोग बिल के दर से उसे ढंग से प्रयोग करेंगे
चावल के इलावा किसी और फसल को बढावा दे.
इस से न सिर्फ ज़मीनी पानी को बचाया जा सकेगा,
बल्कि बिजली की भी बचत होगी
सौर उर्जा से लगने वाले पम्प पर सब्सिडी दे
कोई भी समझ सकता है, अगर बिजली होगी तभी तो उद्योग चलेंगे
हर उद्योगपति बद्दी जा रहा है , गुडगाँव जा रहा है
क्या अब भी आपको अकल नहीं आ रही
या बर्बाद कर के ही हटेंगे
सोचिये ....
दैनिक भास्कर में एक समाचार पड़ा था
आप भी देखें
http://www.bhaskar.com/2009/09/22/090922070827_politics_in_chandiagarh.html
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