और वो अपनी जन्म भूमि पंजाब के लिए..
बहुत देर से एक तमाशा देख रहे थे...
तो दिल किया आज इस पे कुछ लिखा जाए
एक सवाल, राजनीतिज्ञों के लिए
बादल साहब, आप लुधिआना के सिटी सेण्टर के लिए शोर मचते है
या फिर अपना गाँवों का वोट बैंक
और अमरिंदर साहब आप को बादल साहब के ऑरबिट रिसॉर्ट दीखता है
या फिर शहरों का वोट बैंक
भट्ठल मैडम को सिर्फ मुख्यमंत्री की कुर्सी दिखती है
जनाब, कोई जनता को भी देख लो
जिस की वोट ले के आप लोग आये हो...
हर रोज़ 10-12 घंटे का बिजली का कट ...
क्या किसी ने सोचा है, हर रोज़ 10 घंटे बिजली के कट का क्या मतलब है
जो लोग काम कर सकते है वो भी खाली बैठे हो
या फिर उन्हें मजबूर किया जाए की वो लोग जनरेटर का प्रयोग करें
और श्रीमान जी , क्या कोई ये बताएगा
जिन १० घंटा रोज़ का कट लगता है, उस वक्त के लिए बिजली बोर्ड कोई पैसे वापस करता है उपभोक्ता को?
नहीं कोई नहीं देता,
आज भी सब लोग चुंगी दे रहे है, बिजली के बिल पर,
हालांकि चुंगी नहीं है पंजाब में
इस सस्ती लोकप्रियता के लिए सब को तकलीफ न दे....
एक बहुत पुरानी बात है,
मुफ्त में मिली चीज़ की कीमत नहीं पड़ती
उसी तरह मुफ्त में मिले पानी की कीमत नहीं पड़ रही
मोटर चल रही है
पानी बाहर जा रहा है
किसी को फर्क नहीं
हर साल ज़मीनी पानी 5-10 फुट नीचे जा रहा है
किसी को फर्क नहीं
आँखें खोलिए
बिजली के मीटर लगाइए
जो लोग पानी को बर्बाद करते है, वो लोग बिल के दर से उसे ढंग से प्रयोग करेंगे
चावल के इलावा किसी और फसल को बढावा दे.
इस से न सिर्फ ज़मीनी पानी को बचाया जा सकेगा,
बल्कि बिजली की भी बचत होगी
सौर उर्जा से लगने वाले पम्प पर सब्सिडी दे
कोई भी समझ सकता है, अगर बिजली होगी तभी तो उद्योग चलेंगे
हर उद्योगपति बद्दी जा रहा है , गुडगाँव जा रहा है
क्या अब भी आपको अकल नहीं आ रही
या बर्बाद कर के ही हटेंगे
सोचिये ....
दैनिक भास्कर में एक समाचार पड़ा था
आप भी देखें
http://www.bhaskar.com/2009/09/22/090922070827_politics_in_chandiagarh.html
बहुत देर से एक तमाशा देख रहे थे...
तो दिल किया आज इस पे कुछ लिखा जाए
एक सवाल, राजनीतिज्ञों के लिए
बादल साहब, आप लुधिआना के सिटी सेण्टर के लिए शोर मचते है
या फिर अपना गाँवों का वोट बैंक
और अमरिंदर साहब आप को बादल साहब के ऑरबिट रिसॉर्ट दीखता है
या फिर शहरों का वोट बैंक
भट्ठल मैडम को सिर्फ मुख्यमंत्री की कुर्सी दिखती है
जनाब, कोई जनता को भी देख लो
जिस की वोट ले के आप लोग आये हो...
हर रोज़ 10-12 घंटे का बिजली का कट ...
क्या किसी ने सोचा है, हर रोज़ 10 घंटे बिजली के कट का क्या मतलब है
जो लोग काम कर सकते है वो भी खाली बैठे हो
या फिर उन्हें मजबूर किया जाए की वो लोग जनरेटर का प्रयोग करें
और श्रीमान जी , क्या कोई ये बताएगा
जिन १० घंटा रोज़ का कट लगता है, उस वक्त के लिए बिजली बोर्ड कोई पैसे वापस करता है उपभोक्ता को?
नहीं कोई नहीं देता,
आज भी सब लोग चुंगी दे रहे है, बिजली के बिल पर,
हालांकि चुंगी नहीं है पंजाब में
इस सस्ती लोकप्रियता के लिए सब को तकलीफ न दे....
एक बहुत पुरानी बात है,
मुफ्त में मिली चीज़ की कीमत नहीं पड़ती
उसी तरह मुफ्त में मिले पानी की कीमत नहीं पड़ रही
मोटर चल रही है
पानी बाहर जा रहा है
किसी को फर्क नहीं
हर साल ज़मीनी पानी 5-10 फुट नीचे जा रहा है
किसी को फर्क नहीं
आँखें खोलिए
बिजली के मीटर लगाइए
जो लोग पानी को बर्बाद करते है, वो लोग बिल के दर से उसे ढंग से प्रयोग करेंगे
चावल के इलावा किसी और फसल को बढावा दे.
इस से न सिर्फ ज़मीनी पानी को बचाया जा सकेगा,
बल्कि बिजली की भी बचत होगी
सौर उर्जा से लगने वाले पम्प पर सब्सिडी दे
कोई भी समझ सकता है, अगर बिजली होगी तभी तो उद्योग चलेंगे
हर उद्योगपति बद्दी जा रहा है , गुडगाँव जा रहा है
क्या अब भी आपको अकल नहीं आ रही
या बर्बाद कर के ही हटेंगे
सोचिये ....
दैनिक भास्कर में एक समाचार पड़ा था
आप भी देखें
http://www.bhaskar.com/2009/09/22/090922070827_politics_in_chandiagarh.html
स्वागत है आपका चिटठा जगत में,आपको मेरी शुभकामनाएं
ReplyDeleteयहाँ पर भी आयें
http://shilpkarkemukhse.blogspot.com
http://ekloharki.blogspot.com
http://lalitdotcom.blogspot.com
http://lalitvani.blogspot.com
http://adahakegoth.blogspot.com
http://www.gurturgoth.com
narayan narayan
ReplyDeletenice.welcome
ReplyDelete