जिस देश में करोडों लोग 10-20 रुपये रोज़ की आमदनी पे जीने को मजबूर हो...
जहाँ 90 रुपये किलो दाल मिलती हो....
बार बार लगातार...
और उनकी पुतला ट्रेन रुकने का नाम ही नहीं ले रही...
पहले लोगों के मरने के बाद पुतले लगाये जाते थे...]
अब जीवित लोगों के लगाये जाते है...
करोडो, अरबों रुपये मैडम के पुतले लगाये जाते है...
पार्क बनाये जाते है....
आँखें खोलो और जनता के लिए कुछ करें...
अब इस पर तुर्रा ये,
अगर इस बात पर ऐतराज़ किया जाए,
तो दलित तुष्टिकरण की बात की जाती है...
कहा जाता है, की सवर्ण जातियाँ जल रही है....
मायावती मैडम,
जो भूख से मरता है, वो दलित या सवर्ण नहीं होता...
वो इंसान होता है, गरीब होता है, भूखा होता है....
आपका पुतला लगने से किसी को कुछ नहीं मिलेगा...
लोगों को रोज़गार देने के लिए कुछ करें,
इन करोडों रुपये के साथ लोगों के भले का कुछ काम करें....
आँखें खोलें,
इस लेख से जुडा उत्तर प्रदेश हाई कोर्ट का एक फैसला पढें


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